📅 चंदौसी/संभल | 27 अगस्त 2025
उत्तर प्रदेश के संभल ज़िले में मेला गणेश चौथ की ड्यूटी पर तैनात सिपाही रजनीश की मौत ने प्रशासन की लापरवाही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सोमवार सुबह करीब 10 बजे सीकरी गेट कबीर गली पुलिया के पास, भारी बारिश के दौरान सिपाही का पैर फिसला और वह खुले नाले में जा गिरा। हादसा इतना दर्दनाक था कि मौके पर ही उसकी जान चली गई। पुलिस ने शव को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
हादसा या लापरवाही?
यह कोई पहला मामला नहीं है जब खुले नाले ने किसी की जान ली हो। सवाल यह है कि नगर पालिका परिषद और मेला प्रभारी ने ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए?
- क्या नाले के पास बैरिकेडिंग की गई थी?
- क्या बारिश में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद थी?
- क्या प्रशासन सिर्फ हादसों के बाद हरकत में आता है?
बार-बार क्यों दोहराते हैं हादसे?
चंदौसी और संभल क्षेत्र में अक्सर नालों में गिरने से लोगों की मौत होती रहती है। हर बार जिम्मेदार विभाग सबक लेने की बात करते हैं लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते।
नाले पर बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड लगाना प्रशासन के लिए कोई मुश्किल काम नहीं है, लेकिन इनकी अनदेखी सीधे-सीधे लोगों की जान पर भारी पड़ रही है।
परिवार और समाज पर असर
सिपाही रजनीश की अचानक हुई मौत ने उसके परिवार को ही नहीं बल्कि पूरे पुलिस विभाग को भी झकझोर दिया है। परिजन सवाल कर रहे हैं कि हल्की सी लापरवाही ने क्यों छीन ली एक जवान सिपाही की जान?
STV India News की राय
हम मानते हैं कि हादसों को किस्मत का खेल मानकर नज़रअंदाज़ करना सबसे बड़ी गलती है।
खुले नाले हादसे नहीं बल्कि मानव निर्मित त्रासदी हैं।
अगर जिम्मेदार अधिकारी और एजेंसियां समय रहते कदम उठाएं तो ऐसी जानें बचाई जा सकती हैं।
👉 अब वक्त आ गया है कि खुले नालों को तुरंत ढका जाए, बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए।
ताकि आने वाले समय में कोई और परिवार ऐसी दर्दनाक त्रासदी का शिकार न हो।
✍ लेखक: STV India News Team
📌 प्रकाशन तिथि: 27 अगस्त 2025











